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जीवनी कबीर साहेब जी की

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कबीर जी की जीवनी कबीर जी अपनी दोहावली ओर कविताओं से चर्चित रहे हैं सन 1398 में कमल के फूल पर प्रकट हुए थे 2 मुसलमान दम्पति उनको वहां से घर ले गए जुलाहा का काम करने से जुलाहा धानक कहाये कबीर जी एक महान थे इन्होंने जाती धर्म के लिए लड़ रहे सभी को बताया कि हम सब एक परमात्मा के बच्चे हैं कबीर जी ने सबको समान मानते हुए ज्ञान प्रचार किया  कबीर जी ने नकली धर्म गुरुओ की धर्म के नाम पर चल रही दुकाने बंद की, कविताओं ओर दोहवलीयो के माध्यम से सबको मोहक वाणी गा कर ज्ञान बताया ।। कबीर जी की लीलाएं 👉कबीर जी जब शिशु अवस्था मे थे तब 25 दिन तक कुछ आहार नही किया था पर फिर कबीर जी का शरीर ऐसे स्वस्थ था जैसे बच्चा किलो दूध रोज पिता हो और व्रद्धि ऐसे हो रही थी जैसे कमल का फूल बढ़ता है। पर उनके मुह बोले माता पिता नीरू नीमा को अधिक दुःख होने लगा कि ये बच्चा कुछ खा पी नही रहा तो मर जायेगा क्योंकि वो कबीर जी को एक आम साधारण बालक जान रहे थे, फिर कबीर जी ने उनको दुःखी देख कर एक महात्मा में प्रेरणा की उनसे कुँवारी गाय मंगवाई नीरू के द्वारा फिर कबीर जी की कृपा से उस क्वांरी ने वो दूध पिया तब उनके मुह बोले माता प...

शिवरात्रि का व्रत कितना लाभदायक है?

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लोकवेद दंत कथा के आधार पर विवरण मान्यता है कि जो भी जातक महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं उन्हें नरक से मुक्ति मिलती है और आत्मा की शुद्धि होती है। इस दिन जहां- जहां भी शिवलिंग स्थापित है, उस स्थान पर भगवान शिव का स्वयं आगमन होता है। इसलिए शिव की पूजा के साथ शिवलिंग की भी विशेष आराधना करने की परंपरा है। शिव अपने भक्तों को सच्चे दिल से आशीर्वाद देते हैं। पवित्र सद्ग्रन्थों के अनुसार श्री ब्रम्हा विष्णु महेश जी तीनो श्री देवी दुर्गा जी के पुत्र है और इनके पिता ज्योति निरंजन काल है।। श्री शिव जी तीन लोक के मालिक है, ये सर्वशक्तिमान परमात्मा नही है ये केवल निमयानुसार कार्य ही कर सकते हैं जिसके भाग्य में जो लिखा है वो ही दे सकते हैं, उससे अधिक ओर कम ये नही कर सकते हैं।। प्रमाण देखिए देवीभागवत से-👇 🔆 पवित्र गीता जी  के अध्याय 6 के श्लोक 16 मे गीता ज्ञान देने वाले भगवान कह रहे हैं कि अर्जुन - ये साधना भक्ति योग, न तो ज्यादा खाने वाले कि सफल हैं और न बिल्कुल न खाने वाले कि मतलब व्रत करना गीता जी मे मना किया है।। व्रत करना शास्त्रविरुद्ध साधना है इसे करने में भूखे मरने में कोई लाभ नही है भक्...

संत रामपाल जी महाराज जी के संघर्ष की कहानी

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संत रामपाल जी महाराज जी की जीवनी 🔆संत रामपाल जी का जन्म 8 सितम्बर 1951 को गांव धनाना जिला सोनीपत हरियाणा में एक किसान परिवार में हुआ। पढ़ाई पूरी करके हरियाणा प्रांत में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजिनियर की पोस्ट पर 18 वर्ष कार्यरत रहे। सन् 1988 में परम संत रामदेवानंद जी से दीक्षा प्राप्त की तथा तन-मन से सक्रिय होकर स्वामी रामदेवानंद जी द्वारा बताए भक्ति मार्ग से साधना की तथा परमात्मा का साक्षात्कार किया। संत रामपाल जी को नाम दीक्षा 17 फरवरी 1988 को फाल्गुन महीने की अमावस्या को रात्राी में प्राप्त हुई। उस समय संत रामपाल जी महाराज की आयु 37 वर्ष थी। उपदेश दिवस (दीक्षा दिवस) को संतमत में उपदेशी भक्त का आध्यात्मिक जन्मदिन माना जाता है। संत रामपाल जी महाराज जी को नाम दान का आदेश प्राप्त होना 🔆  सन् 1993 में स्वामी रामदेवानंद जी महाराज ने आपको सत्संग करने की आज्ञा दी तथा सन् 1994 में नामदान करने की आज्ञा प्रदान की। भक्ति मार्ग में लीन होने के कारण जे.ई. की पोस्ट से त्यागपत्र दे दिया जो हरियाणा सरकार द्वारा 16.5.2000 को पत्र क्रमांक 3492-3500, तिथि 16.5.2000 के तहत स्वीकृत है। सन् 1994 स...

असली ब्राह्मण कौन

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🔰भारत मे जाति को लेकर बहुत विवाद रहा है भारत देश मे हिन्दू धर्म मे सर्व श्रेष्ठ माने जाने वाले ब्राह्मण जाति है ● इंसान किसी भी जाति धर्म या मजहब से महान नही बनता है, असली ब्राह्मण कौन  【कबीर परमात्मा कहते हैं- "ब्राम्हण वही जो ब्रह्म बिछाने"】 भावार्थ:- ब्राह्मण वही है जो पूर्ण परमात्मा की पूर्ण जानकारी रखता हो, पवित्र धर्मो के सद्ग्रन्थों को मनाता हो और सभी गर्न्थो के आधार पर भक्ति देता हो।। अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखे जगत गुरु रामपाल जी महाराज जी के मंगल प्रवचन साधना tv पर रात्रि 7:30 से 8:30 तक Visit- www.jagatgururampalji.org Location:- Bundi, Rajasthan 323001, India

NANAK DEV JI

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श्री नानक देव का जन्म विक्रमी संवत् 1526 (सन् 1469) कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को हिन्दू परिवार में श्री कालु राम मेहत्ता (खत्रा) के घर माता श्रीमती तृप्ता देवी की पवित्रा कोख (गर्भ) से पश्चिमी पाकिस्त्तान के जिला लाहौर के तलवंडी नामक गाँव में हुआ। इन्होंने फारसी, पंजाबी, संस्कृत भाषा पढ़ी हुई थी। श्रीमद् भगवत गीता जी को श्री बृजलाल पांडे से पढ़ा करते थे। श्री नानक देव जी के श्री चन्द तथा लखमी चन्द दो लड़के थे। नानक देव जी रोज पास में एक बेई नदी पर नहाने व टहलने जाया करते थे, एक दिन उनको सतलोक से चलकर आकर सत्पुरुष कबीर परमात्मा जी मिले। ओर सतलोक सचखण्ड का ज्ञान बताया।। कबीर परमात्मा ओर गुरुनानक देव जी की काफी वार्ता हुई, नानक देव जी अपनी मनमानी साधना पर अटल थे जो कि ब्रम्हा जी विष्णु महेश तक ही सीमित थी,  http://www.jagatgururampalji.org कबीर परमात्मा ने उन्हें सतलोक लेकर गए तथा ब्रम्हा विष्णु महेश जी की स्तिथि से परिचित करवाया और सतलोक लेकर गए वहां कबीर परमात्मा के अद्बुद्ध राजा के समान सिंहासन पर विराजमान कबीर परमात्मा को देख।। झांकी देख कबीर की नानक की थी वाह। वो सिख्खा के गल पड़ी, अ...

जन्माष्टमी

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श्री कृष्ण जी का जन्म म्रत्यु होता ♻️श्री कृष्ण जी ने माता देवकी जी की कोख से जन्म लिया था तथा एक शिकारी के विषाक्त तीर से प्राण त्यागे थे।। http://www.jagatgururampalji.org जबकि कबीर भगवान जब धरती पर आते हैं तो कमल के फूल पर शशरीर आते हैं और शशरीर वापिस सतलोक को चले जाते हैं।। श्री कृष्ण जी पूर्ण सुख नही दे सकते ♻️♻️श्री कृष्ण जी ने अपने मित्र सुदामा जी के 2 मुठी चावल खा कर उनको धनवान बना दिया था, एक जीवन के लिए।। http://www.jagatgururampalji.org जबकि कबीर परमात्मा ने तैमूरलंग नामक एक लौहार की 2 रोटी खाकर उसको 7 पीढ़ी का राज दिया और जन्म म्रत्यु के बंधन से हमेशा के लिए मुक्त किया।। श्री कृष्ण जी पूर्ण परमात्मा नही है ♻️♻️♻️श्री कृष्ण जी केवल 3 लोक के धनी है मतलब शाषक है और 4 भुजा वाले हैं।। http://www.jagatgururampalji.org जबकि कबीर भगवान अनन्त कोटि ब्रम्हांडो के रचयिता ओर कुल मालिक है और असँख्य भुजाओं ओर सिद्धियों के मालिक है।। Visit: http://www.jagatgururampalji.org Location:-Bundi, Rajasthan 323001, India अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखे प्रतिदिन साधना tv चैनल पर रात्रि 7:30 से 8:30तक...

Holy bible

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❇️परमात्मा साकार है व निराकार? पवित ईसाई धर्म के व्यक्ति मानते हैं कि परमात्मा निआकार है, मतलब वो दिखता नही है उसका कोई रूप नही है। जबकि पवित्र बाइबिल के उतपत्ति ग्रन्थ में लिखा है कि परमात्मा ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप बनाया है मतलब मनुष्य दिखता है तो वो परमात्मा भी उसी की तरह हैं जिससे सिद्ध होता है कि परमात्मा साकार हैं नराकार।। http://www.jagatgururampalji.org फिर उतपत्ति ग्रन्थ के 7वे दिन परमात्मा तख्त पर जा विराजा,परमात्मा का आकार रूप में हैं तभी तो तख्त पर विराजा।। ❇️ क्या मांस खाना खुदा(अल्लाह)का आदेश है? ईसाई धर्म के व्यक्ति मानते हैं कि मांस खाने का आदेश परमात्मा ने दिया है।। जबकि पवित्र बाइबिल के उत्पति ग्रन्थ में जब परमात्मा ने सभी छोटे जीव जंतु तथा जमीन पर रेंगने वाले जीव बना दिये तथा जब मनुष्य को बनाया तब परमात्मा ने मनुष्यों को आदेश दिया था कि ये जितने छोटे बीज वाले पौधे है और जितने फलदार व्रक्ष है वे सब आपके भोजन के लिए हैं।। इससे सिद्ध होता है कि परमात्मा का आदेश किसी जीव की हिंसा करके उसे मारकर खाने का नही है।। अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखे जगत गुरु रामपाल जी महाराज...